JYTS.Hव्रतएकादशी 2026
व्रत कैलेंडर · 2026

एकादशी 2026 तिथियाँ

2026 में 23 एकादशी तिथियाँ हैं। पूरी सूची नीचे दी गई है, जो दिल्ली के मध्याह्न पंचांग से गणना की गई है।

तारीखवारपक्ष
14 जनवरी 2026WedKrishna Paksha
29 जनवरी 2026ThuShukla Paksha
13 फ़रवरी 2026FriKrishna Paksha
27 फ़रवरी 2026FriShukla Paksha
14 मार्च 2026SatKrishna Paksha
28 मार्च 2026SatShukla Paksha
13 अप्रैल 2026MonKrishna Paksha
27 अप्रैल 2026MonShukla Paksha
13 मई 2026WedKrishna Paksha
26 मई 2026TueShukla Paksha
11 जून 2026ThuKrishna Paksha
25 जून 2026ThuShukla Paksha
10 जुलाई 2026FriKrishna Paksha
24 जुलाई 2026FriShukla Paksha
23 अगस्त 2026SunShukla Paksha
7 सितंबर 2026MonKrishna Paksha
22 सितंबर 2026TueShukla Paksha
6 अक्टूबर 2026TueKrishna Paksha
22 अक्टूबर 2026ThuShukla Paksha
4 नवंबर 2026WedKrishna Paksha
20 नवंबर 2026FriShukla Paksha
4 दिसंबर 2026FriKrishna Paksha
20 दिसंबर 2026SunShukla Paksha

एकादशी का महत्व

एकादशी हर पक्ष का ग्यारहवाँ चंद्र दिवस है, जो भगवान विष्णु को समर्पित उपवास के रूप में रखा जाता है। यह हर चंद्र मास में दो बार, शुक्ल और कृष्ण पक्ष में आती है, इसलिए वर्ष में लगभग 24 एकादशी होती हैं।

भक्त अन्न और दाल से उपवास रखते हैं, निर्जल या फलाहार व्रत करते हैं, और अगले दिन द्वादशी में सूर्योदय के बाद पारण करते हैं। एकादशी को शुद्धि और पुण्य के लिए सबसे शक्तिशाली व्रत माना जाता है।

अन्य व्रत कैलेंडर

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में एकादशी कब है?

2026 की एकादशी तिथियाँ: 14 जनवरी 2026, 29 जनवरी 2026, 13 फ़रवरी 2026, 27 फ़रवरी 2026, 14 मार्च 2026, 28 मार्च 2026, 13 अप्रैल 2026, 27 अप्रैल 2026, 13 मई 2026, 26 मई 2026, 11 जून 2026, 25 जून 2026, 10 जुलाई 2026, 24 जुलाई 2026, 23 अगस्त 2026, 7 सितंबर 2026, 22 सितंबर 2026, 6 अक्टूबर 2026, 22 अक्टूबर 2026, 4 नवंबर 2026, 20 नवंबर 2026, 4 दिसंबर 2026, 20 दिसंबर 2026।

एकादशी व्रत कैसे रखें?

भक्त अन्न और दाल से उपवास रखते हैं, निर्जल या फलाहार व्रत करते हैं, और अगले दिन द्वादशी में सूर्योदय के बाद पारण करते हैं। एकादशी को शुद्धि और पुण्य के लिए सबसे शक्तिशाली व्रत माना जाता है।

ये तिथियाँ कैसे निकाली गई हैं?

हर तारीख की गणना दिल्ली के मध्याह्न पंचांग से की गई है। चंद्र तिथि स्थान और समय पर निर्भर करती है, इसलिए अन्य शहरों में व्रत एक दिन आगे-पीछे हो सकता है।

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